नवीनतम लेख
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आओ सखी पाती सुनो
आओ सखी पाती सुनो, यह जो लिखी बृजराज योग करो भूषण तजो, लिखत न आई लाज आँख डली झीनी पड़ीं, पंथ निहार निहार जीभडले छाले पड़े कृष्ण पुकार पुकार।
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मारग प्रेम कौ को समुझै
मारग प्रेम कौ को समुझै, ‘हरिचंद’ यथारथ होत यथा है, लाभ कछु न पुकारन में, बदनाम ही होन की सारी कथा है | जानत है जिय मेरौ भलौ, बिधि और उपाय सबै विरथा है, बाबरे हैं ब्रज के सगरे, मोहि नाहक पूछत कौन विथा है ||
श्री राधा जी और गोविन्द देव जी का
भक्तिकाल में पुनर्प्राकट्य और मिलन
पढ़ें श्री राधा गोविन्द देव जी के प्राकट्य और मिलन की अद्भुत कथा









