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आओ सखी पाती सुनो
आओ सखी पाती सुनो, यह जो लिखी बृजराज योग करो भूषण तजो, लिखत न आई लाज आँख डली झीनी पड़ीं, पंथ निहार निहार जीभडले छाले पड़े कृष्ण पुकार पुकार।
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आओ सखी पाती सुनो, यह जो लिखी बृजराज योग करो भूषण तजो, लिखत न आई लाज आँख डली झीनी पड़ीं, पंथ निहार निहार जीभडले छाले पड़े कृष्ण पुकार पुकार।
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