वैष्णव थाली के लिए एक दिन एडवांस में दोपहर 1:00 से 4:00 बजे के बीच कॉल द्वारा संपर्क करें। व्रत की थाली भी उपलब्ध है| काली मिर्ची और सेंधा नमक ही प्रयोग में लाया जाता है और दैनिक मसाले नहीं होते हैं| वैष्णव थाली और नाश्ते में प्याज - लहसुन नहीं होता और मिर्च - मसाले कम होते हैं|

काहे को वैद बुलावत हो

गोविन्द रसश्रृंगारभाषा - बृज | प्रकार - सवैया

अब वैद्य बुलाने से क्या होगा, मुझे तो ऐसा रोग लग गया है कि नाड़ी ही चली गई है। हृदय ने मानो धड़कना ही बंद कर दिया है। वो गोविन्द की शहद सी मीठी मुस्कान निहारे (देखे) बिना कोई जीवित भी कैसे रह सकता है। वो चंदन जो कर्पूर मिला हुआ होता है, वो गुलाब की पंखुरियाँ, सब मुझे उस श्यामसुंदर की याद दिलाती हैं, जिससे मन विरह में और जलने लगता है, इसलिए इन सब को छिपा कर मुझ से दूर कर दो। और ये तो रोग ही कुछ ऐसा है कि इसमें और कोई उपाय तो बनता नहीं, अब तो बस ऐसा उपाय करो कि मुझे ब्रजराज कृष्ण के दर्शन हो जायें।

काहे को वैद बुलावत हो,
मोहि रोग लगाय के नारी गहो रे।
वा मधुआ मधुरी मुसकान
निहारे बिना, कहो कैसे जियें रे॥
चन्दन लाय कर्पूर मिलाय,
गुलाब छिपाय दुराय धरो रे।
और इलाज कछू न बनै,
ब्रजराज मिलैं सो इलाज करो रे ॥

Love for Krishna
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